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आपका सबसे बड़ा दुश्मन। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। आलस्य से छुटकारा कैसे पाएं।

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ऐसा शायद ही कोई हो, जिसका कोई दुश्मन ना हो। हर आदमी का कोई न कोई दुश्मन होता है। दुश्मन कई प्रकार के होते हैं। कुछ तो मनुष्य रूप में होते हैं, कुछ मानसिक रूप में। रास्ते में आने वाले अड़ंगे और कार्य में पढ़ने वाली बाधाएं भी हमारी दुश्मन बन जाया करती है। मतलब यह है कि हर आदमी का कोई न कोई दुश्मन होता है।              इन दुश्मनों में सबसे बड़ा दुश्मन कौन है?       इस एक प्रश्न के अनेक उत्तर हो सकते हैं। कुछ लोगों की दृष्टि में चिंता आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह मनुष्य को जीते जी तिल-तिल मारता है। कुछ लोग आदमी के भीतर के स्वयं को ही सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं। इस संबंध में सबकी एक राय नहीं हो सकती है। इस प्रश्न के अनेक उत्तर हो सकते हैं।               आप स्वयं सोचिए कि आप का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है?              फिर अपने मित्रों, परिजनों से यही प्रश्न कीजिए। उनका उत्तर आपके उत्तर से अलग होगा। ऐसी विवादास्पद स्थिति में सामूहिक समीक्षा की जाती है। सर्वेक्षण कर...

सफलता कीमत मांगती है| सफलता हासिल कैसे करे|

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हमें हमेशा इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि सफलता अथवा जीत भी अपनी कीमत वसूल करती है। सफलता प्राप्त करने के लिये भी उसका दाम चुकाना पड़ता है।              दरअसल, यह कीमत कठिन परिश्रम, त्याग या साधना के रूप में चुकानी होती है। इसी के आधार पर व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करता है। जो व्यक्ति सफलता के मुकाम तक पहुँचना चाहता है उसे अपने काम के लिये वातावरण बनाने में भी कीमत के रूप में काफी कुछ चुकाना पड़ता है। उसे खुद का परीक्षण करना होता है। खुद से मुश्किल सवाल पूछने होते हैं और सबसे बड़ी बात खुद की परीक्षा में पास होना पड़ता है। यह भी तय करना होता है कि सही काम कौन सा है, आगे बढ़ने की सही दिशा कौन सी है।                  परिस्थियां कैसी भी हो सकती है अनुकूल भी और प्रतिकूल भी। ऐसा बहूत कम होता है कि विकाश के लिये आदर्श व अनुकूल परिवेश मौजूद ही हो। दुनियां के अधिकांश महत्वपूर्ण काम ऐसे व्यक्तियों ने किए हैं, जो इतने बीमार या परेशान थे कि उनसे कोई उम्मीद नही की जा सकती थी। लेकिन इन लोगों ने चुनौत...

मुफ्त के सलाह से कैसे बचें। किसी काम का निर्णय कैसे लें। सही फैसला का चुनाव कैसे करें

   सलाह लें लेकिन अंतिम फैसला खुद लें एक मसहुर कथा है| एक बाप और उसका बेटा गधा बेचने निकले| पिता गधे पर सवार था, बेटा पैदल चल रहा था| वे थोड़ी दूर निकले तब उन्हें कुछ लोग मिले| उनमे से एक ने कहा- देखो तो यह कैसा पिता है| खुद तो गधे पर सवार है और अपने पुत्र को पैदल चला रहा है| उनकी बातें सुनकर पिता गधे से निचे उतर गया और अपने पुत्र को बैठा दिया| कुछ दूर आगे जाने पर कुछ महिलायें मिली| उन्होंने कहा- कैसा बेटा है? बुढा बाप पैदल चल रहा है और खुद मजे से सवारी कर रहा है| उनकी बातें सुनकर सुनकर पिता- पुत्र दोनों पैदल चलने लगें| थोडा दूर आगे जाने पर कुछ और लोग मिले| उन्होंने कहा- कितने मुर्ख हैं दोनों, एक हठा- कट्ठा गधा साथ में हैं| फिर भी सवारी करने की वजाय दोनों पैदल चल रहे हैं| उनकी बातें सुनकर पिता- पुत्र दोनों गधे पर बैठ गये| थोडा दूर आगे गये तो कुछ व्यक्ति और मिले| उन्होंने कहा- दोनों कितने निर्दयी हैं| दोनों पहलवान एक दुबले गधे की सवारी कर रहे हैं| ऐसा लगता है जैसे ये इसे मारना चाहते हैं| उनकी बातें सुनकर पिता- पुत्र गधे से उतर गये और दोनों ने मिलकर गधे को उठा लिया| जब वे बाज...

काम को आसान कैसे बनाये। काम के बोझ से छुटकारा कैसे पाएं। काम मे मौज कैसे करे

        खेल की तरह काम का भी आनंद उठाये  जीवन में सफलता पाने के लिए यह आवश्यक है की आप अपने काम से भी उतना ही आनंद प्राप्त करें, जितना की आपको अपने प्रिय खेल से प्राप्त होता है| यदि आपको कार्य करना बोरिंग भरा लगता है तो जाहिर है की आप कार्य के प्रति समर्पित नही है| जिस कार्य से हमारी जीविका चलती है, उस कार्य के प्रति समर्पण का अभाव तभी होता है, जब हम उस कार्य से संतुष्ट नही होते हैं| शारीरिक, मानसिक मनोरंजन एवं व्यायाम के लिए जिन खेलों को खेलकर हमें आनंद प्राप्त होती है, क्या वह हमारे कार्य से बढ़कर है? नही- फिर हमे अपने करियर संबंधी कार्य में आनंद की प्राप्ति क्यों नही होती? यदि हमे अपने कार्य में भी इसी आनंद की प्राप्ति हो, तो कोई वजह नही की हमारा कार्य हमें सफलता के शिखर पर पंहुचा न सके| आइये कार्य करने के नजरिया को समझते हैं;- एक व्यक्ति ने जिंदगी को काम समझना बंद किया और इसे खेल समझना शुरू कर दिया| अब उसके लिए जिंदगी काम नही है| अब वह ऑफिस में भी काम कर रहा है, तो भी उस पर काम का बोझ नही है| अगर वह झाड़ू भी लगा रहा है, तो भी यह उसके लिए काम नही है| सीधी स...

हन्ता वायरस क्या है और यह कैसे फैलता है।

दुनिया में 17 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले चुके कोरोनावायरस का खतरा जारी है। इस बीच एक और खतरनाक वायरस ने चीन में दस्तक दी है। इसका नाम हंता वायरस है। युनान प्रांत में बस से यात्रा कर रहे एक व्यक्ति की मौत हुई। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, यह मौत हंता वायरस से हुई। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हंता वायरस से मौतका खतरा कोरोना के मुकाबले 24% ज्यादा है।ग्लोबल टाइम्स ने बताया कि युनान से शेंगडॉन्ग जा रहे व्यक्ति की मौत हंता वायरस से हुई। जिस बस में यह संक्रमित सवार था, उसमें 32 अन्य यात्री थे। इन सभी की जांच की जा रही है। चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, यह वायरस चूहों से फैलता है। यह हवा के जरिए नहीं फैलता। यह उन लोगों को अपनी चपेट में लेता है, जो चूहों के मल-मूत्र, सलाइवा और इन चीजों को चेहरे तक ले जाते हैं। इस वायरस की चपेट में आने के शुरुआती लक्षण थकावट, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, चक्कर आना, सर्दी लगना और पेट की समस्याएं होना है। शुरुआती लक्षण दिखने के बाद अगर संक्रमित व्यक्ति का इलाज नहीं किया जाता है तो उसे लो ब्लडप्रेशर, ...

कोरोना वायरस से बचने की पूरी जानकारी। कोरोना वायरस क्या है?

*विश्व स्वास्थ्य संगठन* के अनुसार भारत,ब्रिटेन,अमरीका,इटली,चीन,कोरिया,ईरान,जापान समेत दुनियां के *159 देशों में कोरोना* वायरस फैल गया है और इसके कारण *7529 मौतें* हो चुकी हैं.पूरी दुनियां में इस वायरस से *संक्रमित लोगो की संख्या184976* हो चुकी है.इस वायरस से मृत्यु दर केवल 1या2% ही है जिसमे से बहूत से लोग पहले से ही वृद्ध थे.राहत की बात ये है कि इस वायरस से बहूत से लोग ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं.   इससे बचने के लिए आप नियमित रूप से  *अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं.* जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं.  *संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.*  अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं. ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना ...

कोरोना वायरस क्या है और इससे कैसे बचें

चीन के वुहान शहर से शुरू होने वाला कोरोना वायरस अभी तक 60 से अधिक देशों में फैल चुका है. कोरोना वायरस से मरने वालों का आंकड़ा तीन हज़ार के पार पहुंच चुका है. चीन के बाद अगर कोई देश सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं तो वो दक्षिण कोरिया और इटली हैं. ईरान भी बहुत पीछे नहीं है. दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमण के नब्बे हज़ार से अधिक मामले सामने आए हैं लेकिन इनमें से लगभग अस्सी हज़ार मामले अकेले चीन में ही हैं. शोधकर्ताओं ने अभी तक के आंकड़ों के आधार पर पाया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित प्रति एक हज़ार में से एक शख़्स की मौत हुई है. अगर बात भारत की करें तो भारत में अभी तक कोरोना वायरस के 31 मामलों की पुष्टि हो चुकी है. इनमें से एक मामला देर रात गुड़गांव में सामने आया. देर रात डिजीटल मनी ट्रांसफ़र कंपनी पेटीएम के हवाले से न्यूज़ एजेंसी एएनआी ने ख़बर दी कि उनके गुरुग्राम स्थित ऑफ़िस में एक शख़्स को कोरोना वायरस संक्रमित पाया गया है. यह शख़्स कुछ दिन पहले ही इटली से लौटा था. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर चार मार्च तक 28 मामलों की ही पुष्टि की गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइ...

क्यूरेटिव पिटीशन क्या होता है?

अक्सर हमलोग समाचार या लोगो के द्वारा सुनते हैं कि उसके क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया गया,लेकिन हममे से बहूत से लोग उसका मतलब नही समझ पाते हैं। आज इस लेख के द्वारा हमलोग जानेंगे कि क्यूरेटिव पिटीशन होता क्या है?? Curative Petition शब्द की उत्पति Cure शब्द से हुई है। इसका मतलब होता है उपचार करना। क्यूरेटिव पिटीशन तब दाखिल किया जाता है जब किसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन अंतिम मौका होता है। जिसके ज़रिए वह अपने लिए चीफ जस्टिस या राष्ट्रपति के पास गुहार लगा सकता है। क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होता है, इसमें फैसला आने के बाद अपील करने वाले व्यक्ति के लिए आगे के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं। क्यूरेटिव पिटीशन का कांसेप्ट 2002 में रुपा अशोक हुरा मामले की सुनवाई के दौरान हुआ था। जब ये पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराये जाने के बाद भी क्या किसी आरोपी को राहत मिल सकती है? नियम के मुताबिक ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति रिव्यू पिटीशन डाल सकता है लेकिन सवाल ये पूछा गया कि अगर रिव्यू पिटीशन भी खारिज...

अब बिहार के शिक्षकों का क्या होगा

#आखिर बिहार के शिक्षक हड़ताल पर क्यो है,पूरा मामला को समझते हैं इस लेख के द्वारा                                  सबसे पहले हम समझेंगे ये शिक्षक कौन हैं और आम शिक्षकों के मुकाबले में इन्हें कितना कम वेतन मिलता है                      बिहार में 2003 से सरकारी स्कूलों में शिक्षा मित्र रखे जाने का फैसला किया गया था, उस वक्त में दसवीं और बारहवीं में प्राप्त अंकों के आधार पर इन शिक्षकों को 11 महीने के अनुबंध पर रखा गया था. इन्हें मासिक 1500 रुपये का वेतन दिया जा रहा था. फिर धीरे धीरे उनका अनुबंध भी बढ़ता रहा और उनकी आमदनी भी बढ़ती रही.                 2006 में इन शिक्षा मित्रों को नियोजित शिक्षक के तौर पर मान्यता मिली. मौजूदा समय में इन नियोजित शिक्षकों में प्राइमरी टीचरों को 22 हजार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, वहीं माध्यमिक शिक्षकों को 22 से 29 हजार रुपये मिलते हैं, हाई स्कूलों के ऐसे शिक्षकों को 22 से 30 ...

आजादी के बाद से बिहार का राजनीतिक सफर

आज यक़ीन करना मुश्किल लगता है कि 1952 तक बिहार देश का सबसे सुशासित राज्य था और इसी बिहार में, जो 270 ईसा पूर्व में मगध था, सम्राट अशोक ने प्रशासन प्रणाली एक ढाँचा विकसित किया था. आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस चल रही है कि क्या सम्राट अशोक ने ही आधुनिक खुली अर्थव्यवस्था की नींव रखी थी. लेकिन यह विडंबना है कि समकालीन राजनीति में उसी बिहार का उल्लेख सबसे अराजक राज्य के रुप में होता है. इसी बिहार ने आज़ादी के बाद का देश का अकेला जनआंदोलन खड़ा किया लेकिन यही बिहार ग़रीबी और कुपोषण से लेकर राजनीति के अपराधीकरण तक के लिए बदनाम भी सबसे अधिक हुआ. हाल के दिनों में आंकड़ो ने बिहार के बदलने के संकेत दिए हैं लेकिन ज़मीनी स्थिति कितनी बदली है यह अभी अस्पष्ट है. कांग्रेस का दबदबा बिहार विधानसभा बिहार विधानसभा ने लगातार अस्थिर सरकारों का दौर भी देखा है अन्य उत्तर भारतीय राज्यों की तरह ही बिहार भी लंबे समय तक कांग्रेस के प्रभाव में रहा है. वर्ष 1946 में श्रीकृष्ण सिन्हा ने मुख्यमंत्री का पद संभाला तो वे वर्ष 1961 तक लगातार इस पद पर बने रहे. चार छोटे ग़ैर कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल को छोड़ दें तो...

हिन्दू धर्म को किसने और कब बनाया # हर हिन्दू को ये बात जरूर जाननी चाहिए 👏

संपूर्ण विश्व में पहले वैदिक धर्म ही था। फिर इस धर्म की दुर्गती होने लगी। लोगों और तथाकथित संतों ने मतभिन्नता को जन्म दिया और इस तरह एक ही धर्म के लोग कई जातियों व उप-जातियो...

आखिर क्यों? क्या हम अपने ही लोगों का खून बहाकर ,इतिहास को दुहराना चाहते हैं

हर   काल में इतिहास को दोहराया गया। इस बार इतिहास फिर दोहराया जा रहा है। वर्तमान में भारत की राजनीति हिन्दुओं को आपस में बांटकर सत्ता का सुख भोगने में  कुशल हो चुकी है। ये बा...