मुफ्त के सलाह से कैसे बचें। किसी काम का निर्णय कैसे लें। सही फैसला का चुनाव कैसे करें

   सलाह लें लेकिन अंतिम फैसला खुद लें
एक मसहुर कथा है| एक बाप और उसका बेटा गधा बेचने निकले| पिता गधे पर सवार था, बेटा पैदल चल रहा था| वे थोड़ी दूर निकले तब उन्हें कुछ लोग मिले| उनमे से एक ने कहा- देखो तो यह कैसा पिता है| खुद तो गधे पर सवार है और अपने पुत्र को पैदल चला रहा है| उनकी बातें सुनकर पिता गधे से निचे उतर गया और अपने पुत्र को बैठा दिया| कुछ दूर आगे जाने पर कुछ महिलायें मिली| उन्होंने कहा- कैसा बेटा है? बुढा बाप पैदल चल रहा है और खुद मजे से सवारी कर रहा है| उनकी बातें सुनकर सुनकर पिता- पुत्र दोनों पैदल चलने लगें| थोडा दूर आगे जाने पर कुछ और लोग मिले| उन्होंने कहा- कितने मुर्ख हैं दोनों, एक हठा- कट्ठा गधा साथ में हैं| फिर भी सवारी करने की वजाय दोनों पैदल चल रहे हैं| उनकी बातें सुनकर पिता- पुत्र दोनों गधे पर बैठ गये| थोडा दूर आगे गये तो कुछ व्यक्ति और मिले| उन्होंने कहा- दोनों कितने निर्दयी हैं| दोनों पहलवान एक दुबले गधे की सवारी कर रहे हैं| ऐसा लगता है जैसे ये इसे मारना चाहते हैं|
उनकी बातें सुनकर पिता- पुत्र गधे से उतर गये और दोनों ने मिलकर गधे को उठा लिया| जब वे बाजार पहुचें तो वंहा पर लोग इन्हें देखकर हसने लगे| सभी कहने लगें- कितने मुर्ख हैं दोनों, कंहा तो इन्हें गधे की सवारी करनी चाहिए थी और कंहा ये दोनों गधे को उठाये हुए हैं| नए समय की कथा अब यंहा से शुरू होती है| पिता- पुत्र ने विचार किया बजाय लोगो की बातों पर ध्यान देने के इस गधे से ही पूछा जाए उसका क्या विचार है? तब गधे ने उत्तर दिया की बड़े मजे में हु क्योकि जब मालिक या उसका उपयोग करने वाले भ्रम में हों तो लाभ मुझे मिलना है| इस कहानी से यही समझने को मिलता है की हमे लोगो की बातो पर ज्यादा ध्यान नही देना चाहिए| हम सभी लोगो को खुश नही कर सकते हैं| 
जीवन की वास्तविकता भी कुछ ऐसी ही है| आप किसी भी काम को करेंगे तो मुफ्त के सलाह देने वाले आपके पास पहुच जायेंगे और आपको अपनी राय से लाभ पहुचाने का प्रयास करेंगे| लेकिन सभी के सलाह ठीक नही हो सकते हैं| अतः अंतिम फैसला अपने अनुसार करें ताकि किसी तरह का पछतावा न रहें| हम बहूत से काम इस बात को लेकर छोड़ देते हैं की लोग क्या कहेंगे? हमे जीवन में उसी काम को करना चाहिए जो वास्तव में अच्छा हो और उससे किसी को नुक्सान न हो| हम दूसरों का नुक्सान करके कभी भी अपना भला नही कर सकतें हैं| 
“सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग”

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