नई दुनिया # नई समाज # नई सोच
*एक नई पीढ़ी की सोच*
यह माहौल जिसे हम समाज कहते हैं ,हमारे कई पीछे की पीढ़ियों से चली आ रही है।हम इसे आसानी से स्वीकार भी करते आ रहे हैं क्योंकि यह हमारे लोभ,हमारे अधिकार और हमारे भर्म को बनाये रखने में सहायक होता है।इस भर्म को रहते न तो समाज मे एकता आ सकती है और न शांति ।जब तक हम व्यक्ति व्यक्ति के बीच के सम्बंध को नही समझ लेते ,तब तक हम शांतिपूर्ण समाज की रचना नही कर सकते ।
चुकी इन्शान का सम्बंध अधिकार से ज्यादा प्रेम पर आधारित होता है ,अतः हमें अपने के प्रति ज्यादा जागरूक रहना चाहिये ।एक प्रेम की उतपत्ति ,इसके कारणों और इसके अधिकार के प्रति ,सम्पूर्ण प्रतिक्रिया के प्रति ,इसके भय,इसकी सम्पूर्ण प्रतिक्रिया के प्रति गहराई तक सोचने से एक समझ आती है जो पूर्ण भी होती है और समाज के लिये उचित भी होता है।यही समझ हमे निर्भरता और अधिकार से मुक्त कराती है ।इन्शान की असली समझ तो उसके अंदर से ही आती है।
धीरज वाणी
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