लक्ष्य बनाओ आगे बढ़ो

*लक्ष्य से भटके हुए एक व्यक्ति की सोच*
लक्ष्य जीवन की दशा और दिशा दोनों निर्धारित करता है।इसी से जीवन की सफलता एवं असफलता साबित होती है।लक्ष्यविहीन व्यक्ति जीवन की भूल -भुलैया के अंदर भटकता रहता है।वैसे व्यक्ति के जीवन मे कही रास्ता नही मिलती,कोई सफलता नही मिलती ,दृष्टि भर्मित रहती है।कहाँ जाए ? कैसे जाए ? कब जाए ?क्यों जाए ?उसे इस उलझन भरे कई प्रश्नों का हल भी नही मिल पाता है।अपने लक्ष्य को निर्धारित किये बिना अपने अंदर की शक्तियों को प्रयोग में नही लाया जा सकता है ।जीवन की अनगिनत सम्भावनाये सच होने से पहले ही मुरझाने - कुम्हलाने लगती है।
               जीवन की सबसे ज्यादा जरूरी चीज है वो है अपने लक्ष्य का निर्धारण ।अपनी लक्ष्य का चुनाव करते समय अपनी क्षमता ,परिस्थिति एवं अपने जीवन के बारे में अच्छी तरीके से जान लेना बहूत आवश्यक होता है।हमे अपनी क्षमता एवं प्रतिभा का भी अच्छी तरीके से ज्ञान होना चाहिये।हमे अपनी उस सभी विशेषताओं को जानना और तलाशना चाहिये जो बाहर निकलने के लिये बेचैन हो रही है,छटपटा रही है।हमें उन सभी विशेषताओं की एक सूची बनानी चाहिए और फिर उन्हें उजागर करने और उपयोग में लाने के लिये अपनी क्षमता को देखनी चाहिये ।सबसे पहले हमें यह देख लेना चाहिये कि हम अपनी किस खूबी को प्रयोग में लाने हेतू सक्षम हैं।
     ।।।।          धीरज वाणी

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