अगर आपके जीवन मे जरा सा भी खुशी नही है तो यह जरूर पढ़ें

% *अगर आप डिप्रेशन का शिकार हैं तो यह मैसेज आपके लिये*%
जिस प्रकार बिना मर्जी के घर में घुस आए व्यक्ति अथवा जानवर को हम बाहर निकाल देते हैं, ठीक उसी प्रकार नाकारात्मक सोच को भी अपने दिमाग से बाहर निकाल देना चाहिये।हम कई प्रकार के डर,असुरक्षा तथा हीन भावना को अपने दिमाग में बनाये रखते हैं और उसी के साथ अपने जीवन को गुजारते रहते हैं।हमें ऐसा लगने लगता है कि जो विचार हमारे दिमाग में चल रहा है उसे नही बदला जा सकता है और न ही उससे छुटकारा पाया जा सकता है।लेकिन वास्तव में ऐसा नही है विचारों को बदला भी जा सकता है और उससे छुटकारा भी पाया जा सकता है।वास्तव में अपने मन की शांति के लिये अपने दिमाग को खाली करने का कोशिश करें।
                  क्या आपने कभी महसूस किया है कि जब हम अपने चिंता को किसी अपने से बताते हैं तो हमारे दिल का बोझ कभी कम हो जाता है ।लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है केवल दिमाग को खाली करना ही काभी नही है।जब हमारा दिमाग खाली रहता है तो कोई न कोई चीज अंदर जरूर चली जाती है।दिमाग को बहूत समय तक बिना कुछ सोचे नही रखा जा सकता है।अगर आप अपने दिमाग में कुछ नया नही भरेंगे तो फिर से वही पुराने विचार आपके दिमाग के अंदर चला जायेगा,जिसे आपने उसे वहां से बाहर निकाला था।
                इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिये ,अपने दिमाग को तुरंत खाली कर उसमें कुछ नया और अच्छा विचार भरना बहूत जरूरी है।फिर जब आपका पुराना डर,असुरक्षा,हीन भावना,नफरत ,चिंता ,जो आपको बहूत समय से परेशान करते आ रहे हैं,आपके दिमाग में फिर से घुसने की कोशिश करेगा तो आपके दिमाग के बोर्ड पर देखेगा की 'जगह नही है' बाहर जाओ अब मुझे तेरी जरूरत नही है क्योकि तुमने मुझे बहूत समय तक परेशान किया है।अगर वे फिर भी नही मानेंगे तो जिस नये और अपने अच्छे विचार को आपने दिमाग मे बैठाया है वे आपके नाकारात्मक सोच के दुश्मन से दुश्मन से लड़ेंगे और उन्हें आपके दिमाग मे कभी नही घुसने देगा।कुछ समय के बाद पुराने विचार पूरी तरह से हार मान लेंगे और आपको हमेसा के लिये छोड़कर चले जायेंगे।इसके बाद आपको पूरी तरह से मन की शांति मिलेगी और जब आपको मन की शांति मिलेगी तब आप खुशी पूर्वक रह पायेंगे।
         "  *इन्शान की वास्तविक खुशी दूसरी वस्तुयों में नही मिलती है जबकि उसके अंदर ही मिलती है*"
"आज से कुछ दिन पहले तक मैं बहूत ज्यादा डिप्रेशन का शिकार था और मैं कई महीनों तक डिप्रेशन का शिकार रहा।कुछ वैसी बात थी जो मेरे दिमाग मे हमेसा चलती रहती थी,जिसकी वजह से मेरा जीवन नरक से भी बदतर बन गया था।न मैं जी पाता था और न मैं मर पाता था,उसी दौरान मैंने आत्महत्या करने का भी कोशिश किया था लेकिन अपने माँ और प्यार की दुआ की वजह से मैं बच गया।मेरे ख्याल से डिप्रेशन कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक बीमारी है।डिप्रेशन में इन्शान हर पल सोच सोच कर मरते रहता है।मैं बहूत कोशिश करता था लेकिन डिप्रेशन से बाहर नही निकल पाता था ,फिर सोचते सोचते मैंने ऐसा किया और अपनी डिप्रेशन से बाहर निकल गया और अब मैं अंदर से खुशी महसूस करता हूँ।
                     मेरे ख्याल से जो भी इन्शान डिप्रेशन का शिकार है और ऐसा करता है तो वह अपनी डिप्रेशन से बाहर निकल सकता है ।।              
नोट:-इस मैसेज को हर डिप्रेशन पीड़ित तक पहुचाने में मेरा मदद करने के लिये इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि एक रोता हुआ चेहरा मुस्कुरा सके।
           धन्यवाद
                       Dhiraj Vaani

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